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धरती अखन कुंवारी संता लिरिक्स // dharati akhan kunwari santa

भजन


धरती अखन कुंवारी संता 

धरती अखन कुवांरी ॥ टेक ॥ 


1- जंबू दीप भोम को राजा 

खंड खंड सब न्यारी । 

परथी को परवाण 

बांधता गई थपरना सारी ॥ १ ॥ 


2- लेय धनुषं इन्द्रासन डोलो 

खपगया सब मणिधारी । 

चकवे ज्यांरा चक्कर चालता 

ऐसा था अवतारी ॥२ ॥ 


3- इन्दर ज्यूं ओगाजां करता 

मेघमाला असवारी , 

वह नर गिया गुड़ींदा खाता , 

कर कर थारी म्हारी ॥ ३ ॥  


4- धरती कहे मैं नहीं किसी की , 

आस करे सव म्हारी । 

कहे कबीर सुनो भाई साधो 

जीवन जरणी जारी ॥४ ॥ 

धरती अखन कुंवारी संता 

धरती अखन कुवांरी ॥


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