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धरती कोई की नहीं लिरिक्स // dharati koi ki nahi lyrics

भजन


मत गरबे हो राजा 

टेक- मत गरबे हो राजा 

धरती कोई की नहीं ॥ टेर ॥ 


1- सतजुग मे हिरणाकुश राजा 

सोनारी कोट सेई 

अरबां खरवां धन बहुतेरा 

कौड़ी साथ न गई ॥ १ ॥ 


2- त्रेता में रावण भया राजा 

सोना री लंक सेई । 

एक लख पूत सवालख नाती 

लकड़ी एक न दई ॥ २ ॥ 


3- द्वापर में दुरयोधन राजा 

केरवां को राज रही । 

सरजन जोधा भीम सरीखा 

खाई गिडंदा देही ॥ ३ ॥  


4- कलयुग में किरसन भयो राजा 

सोवनी दुवारका सेई ।   

चकवे ज्यांरा चक्कर चालता 

गोपियां लूट लही ॥५ ॥ 


5- सतजुग त्रेता द्वापर कलयुग 

चारू जुंगा की कही । 

कहे कबीर सुनो भाई साधो 

थारी म्हारी करता मही ।


धरती कोई की नहीं


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