भजन
टेक- सायब ने भजो गंवारा
मत भूलो बारमबारा ।
ज्यूं जलम्या ज्यू मरणा
सायब आगे लेखा भरणा ॥ टेर ॥
1- बाजीगर खेल रचायो
जद खलक तमाशे आयो ।
बाजीगर ने कला समेटी
जद रह गई आप अगेटी ॥ १ ॥
2- दरसण की मांजत रहिये
दरपण वाला कोई थाने
दरसण देला नांई ॥ २ ॥
3- जो तेरे फल चइये
तो बेल सींचतो रहिये ।
बेली के वो फल लागे
थारो जनम भरण भी भागे ॥ ३ ॥
4- पार उतरणो चइये
तो नावड्याँ उमिल तो रहिये ।
नावड़यां पार लगावे
थाने अम्मर लोक पुगावे ॥४ ॥
5- कहे कबीर हम जाणी
जाणी ज्यां जाय पिछाणी |
पिछाण्यानाय पतीजे
तो मूरखने क्या कीजे ।।
सायब ने भजो गंवारा
मत भूलो बारमबारा ।
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