भजन
टेक- संता के सारणें मेवा नीपजे
नीपजे नीपजे बारा ही मासा ।
सियालु उनालु जोड़े नीपजे ॥टेर ॥
1- साद सती मिल सावण आया
भाष भादवो लागो ।
तीतर मोर पपैइया बोले
रणुकार अब लागो ॥ १ ॥
2- धोरा पाली हेटा राखो
नीर बह ना जाय ।
कूड़ कपट ने काढ़ परो री
जद खेती रस आय ॥ २॥
3- उंचले मगरे भारो घालियों
सुरस रुखाली जाय ।
कुबद चड़खली ने परी उड़ावों
गुरु गम थाट बजाय ॥ ३ ॥
4- गाड़ा भर भर घर ले आया
कोठा भरबा लागा ।
कहे कबीर सुनो भाई साधो
दिल का धोका भागा ॥ ४ ॥
संता के सारणें मेवा नीपजे
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