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होरी खेल मना फागुण का दिन चार भजन लिरिक्स / hori khel mana fagun ke din char bhajan lyrics

भजन


टेक- होरी खेल मना 

फागुण का दिन चार ॥ टेक ॥ 


1- दया धरम की केसर डारो 

प्रेम प्रीत पिचकारी ॥ १ || 


2- मिरदंग ताल जांझ डमरू बाजे 

अनहद धुन झनकार ॥ २ ॥ 


3- उड़त गुलाल लाल भयो बादल 

बरसत रैन अपार ॥ ३ ॥  


4- बीच बीच धुन बाजे 

रंग रंग रणुकार ॥ ४ ॥ 


5- गूंघट के पट खोल दई है 

लोक लाज सब डार ॥ ५ ॥ 


6- खेल तलट घर आवे 

सो कहिये पन प्यार ॥ ६ ॥ 


7- कहे कबीर टरे नहीं टारी 

परम पुरुष की नार ॥ ७ ॥

होरी खेल मना 

फागुण का दिन चार ॥


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