भजन
टेक- सतगुरु घोले अमृत वाणी
बरसे कामली भीजे पाणी ॥ टेर ॥
1- ओघट घाट भरे पणियारी
पातर फूटी गागर सारी ॥ १ ॥
2- तले गागर ऊपर पणियारी
लड़के की गोद में खेले महतारी ॥ २ ॥
3- चलेगा पंछी थाके वाटा
सोवे डोकरिया घोरवे खाटा || ३ ||
4- ससुर सोवे बहु हुलरावे
जागे ससुरा बाग लगावे ॥ ४ ॥
5- खूँटा दूवे भैंस बिलोवे
बैठी मिनिया माखन खावे ॥ ५ ॥
6- नौका डूबे सिला तिरावे
चोली का पाणी बलींडे जावे ।
7- कहत कबीर सुनो नर लोई
ओ पद बूझे बिरला कोई ॥ ६ ॥
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