भजन
टेक- काशी के बासी माडी है मतवाल ॥
1- तन का मटका मनका भावा
ज्ञान ध्यान गुड़ गाल ॥ १ ॥
2- पांचों लकड़ियां बलवा लागी
माटी ले रही है उकाल | २॥
3- जुगती केरी जा जम
सूरत बणी कलाल ॥ ३॥
4- पाँच पचीस मिल पावण लागा
अनुभव चढ़ी खुमाल ॥ ४॥
5- कहें कबीर सुनो भाई साधो
सतगुरु मिला दलाल ॥ ५ ॥
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