भजन
टेक- नाम सिमर मन गैला
सतगुरु देवे हेला ॥ टैर ॥
1- ओ संसार हाट को मेलो
मात पिता सुत भेला ॥
घर की नारी गोत कडूं बां
साथे नही चलेला ॥ १॥
2- लख चौरासी भटकत भटकत
मनखा जनम दोहेला
मनखा जनम मुश्किल से पाया
पुन जाग्याँ भो पेला ॥२ ॥
3- रात दिवस धंधा में लाग्यो
स्वास्थ काज करेला ।
मोह की फांसी में आ फंसियो
अधियां कुटुम्ब संग भेला || ३ ||
4- कंकर चुन चुन महल बनाया
कितना दिन तू रहेला ।
कहे कबीर सुनो भाई साधो
जीवे जीव अकेला ॥४ ॥
नाम सिमर मन गैला
सतगुरु देवे हेला ॥
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