भजन
टेक- मालण जागतां गुरु सेव
तू क्यों भूली ये थारो देव ॥ टेर ॥
1- टांकी दे दे मूरत घड़ाई ।
दे छाती परपांव ।
इस मूरत में सत होवे
घड़वाला ने खाव ॥ १ ||
2- भूली मालण पतियां तोड़े
पाती पाती में जीव
वा पाती तुम देव को चढ़ावो
वो देवत अरयो जीव ॥ २ ॥
3- मीठा मलिन्दा करे चूरमा
ऊपर घी की धार ।
पूजा पुजारी ले गयो है
देवत के आगे छार ॥ ३ ॥
4- डाली में ब्रह्म पानी मे विशनू
फूल में महेसर देव ।
इन तीनू ने तोड़ के तुम
किन की करती सेव ॥ ४ ॥
5- एक नर भूला दोय नर भूला
भूला सव संसार ।
कहे कबीर कोई भगत न भूला
सत्त नाम आधार ॥ ५ ॥
मालण जागतां गुरु सेव
तू क्यों भूली ये थारो देव ॥
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