भजन
टेक- त्रिगुण के ऊपर मेरा
बजने लगा तम्बूर ॥ टैर ॥
1- धर के तम्बूर मैंने ऐसा बजाया
गांव नाम तो सभी थकाया ।
उस मालिक का पता जो पाया
बसे अगम से दूर ॥१ ॥
2- सार अजन्टी वहां बैठाई
चवदह लोक में फिरत दुहाई
दश अवतांरा देह छिटकाई
खंडनभये , जरूर ॥ २॥
3- चवदा लोक अजन्टी जाना
बिरहमंड का हेर ठिकाना ।
भजन भाव तेरा थकिया जाना
झूठां करो फितूर ॥ ३ ॥
4- वाणी तो पाणी भरे यांही
ज्ञान ध्यान तेरा पूंजे नाही ।
साहिब कबीर ने सैन लखाई
चारों भेद मंजूर ॥ ४ ॥
त्रिगुण के ऊपर मेरा
बजने लगा तम्बूर ॥
आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है।

0 टिप्पणियाँ