टेक- मेरे सतगुरु गह लई बाँह
नही तो में बहि जाती ॥ टेर ॥
1- जग झूठा बदनाम है
मन ज्ञानी अभिमान |
सतगुरु बोली बोलिया
जासे भनक पड़ी मेरे कान ॥ १ ॥
मेरे सतगुरु गह लई बाँह
नही तो में बहि जाती ॥
2- बारु नग पैदा किया
धन कारीगर तोय |
सिकलीगर सतगुरु मिले
दरश दिखायो मोय ॥ २ ॥
मेरे सतगुरु गह लई बाँह
नही तो में बहि जाती ॥
3- माया मार ममता तजे
शब्द सनेही होय ।
लोभ लालच सबही तजे
सदगुरु परसे सोय ॥ 3 ॥
मेरे सतगुरु गह लई बाँह
नही तो में बहि जाती ॥
4- काम क्रोध जो त्याग है
तिन घर धरम समाय ।
कहे कबीर ते बांच ही नहीं
तो जमपुर जाय ॥ ४ ॥
मेरे सतगुरु गह लई बाँह
नही तो में बहि जाती ॥
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