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गुरुजी मांने कई विध पार उतारो लिरिक्स / guruji mane kai vidh par utaro lyrics

टेक- गुरुजी मांने कई विध पार उतारो ॥ टेक ॥ 


1- ऊंडा नीर थाग नहीं बांको

दीखे नांहि किनारो । 

बाल बराबर पाल बंधी है 

पवन को चलत सहारो || १ || 

गुरुजी मांने कई विध पार उतारो ॥


2- चाह चमारी करती खवारी 

दिल नहीं देत सहारो । 

तृष्णाजीको बाण चलत है 

गुरु तो बचावन हारो ॥ २ ॥ 

गुरुजी मांने कई विध पार उतारो ॥


3- मोह मगर मुंह फांड़ रयो है 

भंवर पड़े अति भारो । 

दुविधा लारे लाग रही है 

काल को बजत नगारो ॥ ३ ॥

गुरुजी मांने कई विध पार उतारो ॥


4- गुरु का वचन हाथ में चाबुक 

नाम की नौका डारो । 

कहे कबीर सुनो धर्मीदासा 

एहि विधि लागो किनारो । 

गुरुजी मांने कई विध पार उतारो ॥


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