टेक- मिलणां कठिन है
में कैसे मिलूं पिया से जाय ॥ टेर ।।
1- अगम मूमि जहाँ महल की
हमसे चढ्यो न जाय ।
औघट घाट गैल रपटणी
पाव नहीं ठहराय ॥ १
मिलणां कठिन है
में कैसे मिलूं पिया से जाय ॥
2- साध साध कर पग धरूं
बार बार डिग जाय ॥
अति बारीक पंथ बहु झीना
सुरति झकोरा खाय ॥ २ ॥
मिलणां कठिन है
में कैसे मिलूं पिया से जाय ॥
3- लोक लाज मरजाद जगत की
देखत मन सकुचाय ।
जो या बात नहीं जो बने तो
लाज तजी ना जाय ॥ ३ ॥
मिलणां कठिन है
में कैसे मिलूं पिया से जाय ॥
4- दूजे सतगुर मिले पंथ पर
मारग दियो बताय ।
साहेब कबीर मुक्ति के दाता
शीतल अंग लगाय ॥ ४ ॥
मिलणां कठिन है
में कैसे मिलूं पिया से जाय ॥
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