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भणिया गुणीया पण्डित जोशी / bhaiya guniya pandit joshi

साखी - 1- कबीर जितनी आत्मा

और उतना सालगराम

बोलनहारा पूजिये और पाहन सो काम ।


2- सब बन तो तुलसी भई

और पर्वत सालगराम

सब नदिया गंगा भई

जब जाना आतम राम ।


भजन


टेक- भणिया रे गुणीया पण्डित जोशी

जद थारी भक्ति री खबर पड़े

उलट सुलट जाको ध्यान धरे हो जी ।


1- पाणी रा हर पिंड बणाया

सप्तधात केरी बंद धरी

नाभी ना द्वादश त्रिकुटी गगना 

सोवन शिखर बहुरंग बसे

बहुरंग आगे कोण हुआ हो जी ।


2- पांच पचीस गुण तीनो रचिया

ओहंग सोहंग ओंकार धरिया

ओहंग सोहंग आगे अविनाशी

अविनाशी के आगे कोण हुआ हो जी ।


3- चार वेद पर सूक्षम रचिया

क्षर अक्षर दो हरप धरिया

जण अक्षर से अनघड़ न्यारा 

अनघड़ आगे कोण हुआ हो जी ।


4- बेहद भोम भई गेप की नगरी

बिना गुफा से गड़गाप भया

कहे गोरखनाथ अगम अथाह है

थाह अथाह के आगे कोण हुआ हो जी ।


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