साखी - 1- कबीर जितनी आत्मा
और उतना सालगराम
बोलनहारा पूजिये और पाहन सो काम ।
2- सब बन तो तुलसी भई
और पर्वत सालगराम
सब नदिया गंगा भई
जब जाना आतम राम ।
भजन
टेक- भणिया रे गुणीया पण्डित जोशी
जद थारी भक्ति री खबर पड़े
उलट सुलट जाको ध्यान धरे हो जी ।
1- पाणी रा हर पिंड बणाया
सप्तधात केरी बंद धरी
नाभी ना द्वादश त्रिकुटी गगना
सोवन शिखर बहुरंग बसे
बहुरंग आगे कोण हुआ हो जी ।
2- पांच पचीस गुण तीनो रचिया
ओहंग सोहंग ओंकार धरिया
ओहंग सोहंग आगे अविनाशी
अविनाशी के आगे कोण हुआ हो जी ।
3- चार वेद पर सूक्षम रचिया
क्षर अक्षर दो हरप धरिया
जण अक्षर से अनघड़ न्यारा
अनघड़ आगे कोण हुआ हो जी ।
4- बेहद भोम भई गेप की नगरी
बिना गुफा से गड़गाप भया
कहे गोरखनाथ अगम अथाह है
थाह अथाह के आगे कोण हुआ हो जी ।
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