टेक- गुरुदाता म्हांने सजीवण मोहर दई ॥
1- छिन - छिन पाप म्हारा कटवा लागा
बढ़ने लगी म्हारी प्रीत नई ॥ १ ॥
गुरुदाता म्हांने सजीवण मोहर दई ॥
2- बादला थोड़ा साहिब बरखा है भारी
चहुं दिस लाली रही समाई ॥ २ ॥
गुरुदाता म्हांने सजीवण मोहर दई ॥
3- अमरापुरी के मांही खेती बाई
जीरी नगरीक भेंट भई ॥ ३ ॥
गुरुदाता म्हांने सजीवण मोहर दई ॥
4- कहे कबीर सुनो भाई साधो
दिल की दुवध्या दूर हुई ।
गुरुदाता म्हांने सजीवण मोहर दई ॥
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