Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

यूँ ही मन समझावे / yu hi man samjhave

यूँ ही मन समझावे 


साखी


1- चार भुजा के भजन में , भूलि पड़े सब संत । 

कबीर सुमरे तासु को जाके भुजा अनंत ।। 


भजन 


टेक- यूँ ही मन समझावे

बिन खोज कुछ भेद ( मेरहम ) ना पावे 

थारो विरथा जनम गंमावे

हो सुन सायर ज्ञानी

तू यूंही ( फोकट ) ( झूठो ) मन समझावे॥


1. जो नटड़ी या चढ़े बरत पे तो नटड़ो ढोल बजावे । 

ऊपर चढ़कर मंगल गावे , वां सुरत बरत में लावे ॥


2 . जो पनिहारी पानी वां चाले तो बेड़ो भरी ने घर लावे ।

हाले डोले बात बणावे , पर सुरत बेवड़ा में लावे ॥


3. जैसे भुजंग चरे बन मांही , ओस चाटने जावे ।

कभी चाटे कभी मणी को चितवे , वो मणी तज प्राण गंमावे ॥


4 . सती चली वा सत्त करवाने , अपनी काया जलावे । 

मात पिता सुत कुटुम्ब त्याग के , सुरत पति में लावे ॥


5. जो मरजीवा होवे समुंद का तो डुबकी वामे लगावे ।

कहै कबीर सुनो भाई साधो , वो हीरा लाल बीण लावे ॥


संक्षिप्त भावार्थ - इस पद में सदगुरु कधीर ने खोज पर बल देते हुए अपने मन को स्थिर रखने पर जोर दिया है जैसे पणिहारी पानी भरकर सिर पर रखे घड़े पर अपनी सुरति टिकाती है चाहे वह हाथ छोड़कर बात करें या नटड़ी बरत ( रस्सी ) पर चलती है तमासदीन सब उसे देखते है परन्तु उसका ध्यान बात पर ही होता है । भुजंग ( नाग ) चाहे जंगल में चुगता है परन्तु उसका ध्यान हमेगा उस मणि में ही होता है । इसी प्रकार हम इस भौतिक संसार की वैभवता का चकाचौंध में रहकर भी हमारी सुरति शब्द में नाद में धुन में हो तभी जीवन की यर्थातता का अनुभव कर पाएंगे ।


आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है। 


YOU TUBE    -     भजन वीडियो

FACEBOOK   -     FOLLOW

INSTAGRAM  -    FOLLOW

TELEGRAM    -     JOIN

TELEGRAM  GROUP  -  JOIN

TWITTER       -     FOLLOW

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ