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वैराग कठे है मेरा भाई / verag kathe he mere bhai

वैराग कठे है मेरा भाई


साखी 


1- भेस देख मत भूलिये , बूझ लिजिये ज्ञान । 

बिना कसौटी होत नहीं , कंचन की पहचान ॥ 


भजन 


टेक- वैराग कठे है रे मेरा भाई

सब जग बंधा है भरम के मांई।


1 . क्षर नहीं अक्षर नाहीं नाहीं अजपा जाप जपाई । 

बावन अक्षर बोल कोल इनमें बचे न राई । 

वैराग कठे है रे मेरा भाई

सब जग बंधा है भरम के मांई।


2 . वेद कुरान शास्तर गीता एभी तो पूगा नाई ।

छः राग छत्तीस रागनी , अ सब काल खा जाई ॥ 

वैराग कठे है रे मेरा भाई

सब जग बंधा है भरम के मांई।


3 . दस और दोय तीन और तेरा अमिल काल रचाई ।

औहंग सोहंग पोहंग जोहंग , इनकी तो सफरे उड़ाई ॥ 

वैराग कठे है रे मेरा भाई

सब जग बंधा है भरम के मांई।


4- जोगी जती सती सन्यासी बन्दिया भरम के मांई ।

अनेक मुनिजन भूकों मर गिया , नाहक देह न सताई ।। 

वैराग कठे है रे मेरा भाई

सब जग बंधा है भरम के मांई।


5 . तेरा बारी अजब झरोका ये मिल गोटे आई । 

कहै कबीर सुनो भाई साधू , गुरु बिन गेला नाई।।

वैराग कठे है रे मेरा भाई

सब जग बंधा है भरम के मांई।


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