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अवधू खोज्या का घर न्यारा / avdhu khojya ka ghar nyara

अवधू खोज्या का घर न्यारा 


साखी 


1- सहज शून्य में , सांईयां ताका वार न पार । 

धरा सकल जग धरी रहा , आप रहा निरधार ।। 


भजन 


टेक- अवधू खोज्या का घर न्यारा

खोज बतावे ज्याने गुरु कर मानू नहीं तो छाप हमारा ॥


1- धरती को भार धवल पर कहिये बांस करे सिर भारा । 

कच्छ मच्छ को किसके ऊपर कोरम किन का सारा ॥ 

अवधू खोज्या का घर न्यारा


2- कौन शब्द से रची धरती कौन शब्द असमाना । 

कौन शब्द से चन्दा सूरा किनसे पानी पवना ॥ 

अवधू खोज्या का घर न्यारा


3 . सात तबक तो नीचा कहिये सात तबक है ऊँचा । 

चवदा लोक की खोज बतावे सो जानूं व पूछा । 

अवधू खोज्या का घर न्यारा


4- मंडप मंडा जब कहाँ जा बैठा ताको करो विचारा ।

कहै कबीर सुनो भाई साधू सांच कहो ततसारा ॥

अवधू खोज्या का घर न्यारा


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