Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

ओ तो घर बेनामी बेनामी / o to ghar benami

ओ तो घर बेनामी


साखी


1- शब्द जहाज कबीर का , सद्गुरुर खेवण हार । 

दूरमति छोड़ हंसा चढ़े , भव से उतरे पार ॥ 


भजन


टेक- ओ तो घर बे नामो बे नामी॥ 


1- ज्ञान ध्यान जप तप नहीं साधन वेद कुरान नहीं वाणी ।

छ : राग छत्तीस रागणी असब काल खवाणी । 

ओ तो घर बे नामो बे नामी॥


2 . आवे न जाय मरे नहीं जनमें नहीं पड़े मुख वाणी 

को में किसका नूर बखाणूं दुनियां तो भरम भुलाणी । 

ओ तो घर बे नामो बे नामी॥


3. है नहीं रंग रंग नहीं वाके ऐसी अदल छपाणी

दिसट मुसट आवे नहीं सजना माया तो फिरे रे दिवानी ॥

ओ तो घर बे नामो बे नामी॥


4. हे वो अथा थाग नहीं वहां का कोई बिरला जन जाणी ।

कहत कबीर सुनो भाई साधू आ है मुगत निसाणी ॥

ओ तो घर बे नामो बे नामी॥


आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है। 


YOU TUBE    -     भजन वीडियो

FACEBOOK   -     FOLLOW

INSTAGRAM  -    FOLLOW

TELEGRAM    -     JOIN

TELEGRAM  GROUP  -  JOIN

TWITTER       -     FOLLOW

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ