सतगुरु राह उधारी अगम की
साखी
1- सद्गुरु की महिमा अनंत है अनंत किया उपकार ।
अनंत लोचन उघाड़िया अनंत दिखा वन हार ॥
2- सतगुरु तो सत्भाव है जो असभेद बताय ।
धन्य भाग धन्य शिष जेहि सो ऐसी सुधि पाय ॥
भजन
टेक- सतगुरु राह उधारी अगम की
सतगुरु राह उधारी॥
1- जतन जतन जो तन मन सिरजे
सुखमण सेज संवारी ।
जागत रहे पलक नहीं लागे ,
चाखत अमल करारी ॥
सतगुरु राह उधारी अगम की
सतगुरु राह उधारी॥
2- सुमति अंजन भर भर दीजे
मिटे लहर अंधियारी ।
छूटे त्रिविध भरम भय जनका
सहजै भई उजियारी ॥
सतगुरु राह उधारी अगम की
सतगुरु राह उधारी॥
3- ज्ञान गली मुक्ति के द्वारे
पिच्छम खुली किंवाड़ी ।
नौबत बाजि ध्वजा फैहराणी
सुरत चढ़ी अटारी ॥
सतगुरु राह उधारी अगम की
सतगुरु राह उधारी॥
4- हैही चाल मिलो साहेब से
मानो कही हमारी ।
कहै कबीर सुनो भाई साधो
चेत चलो नर नारी ।।
सतगुरु राह उधारी अगम की
सतगुरु राह उधारी।।
आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है।
YOU TUBE - भजन वीडियो
FACEBOOK - FOLLOW
INSTAGRAM - FOLLOW
TELEGRAM - JOIN
TELEGRAM GROUP - JOIN
TWITTER - FOLLOW

0 टिप्पणियाँ