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सतगुरु राह उधारी अगम की / satguru rah udhari agam ki

सतगुरु राह उधारी अगम की 


साखी 


1- सद्गुरु की महिमा अनंत है अनंत किया उपकार ।

अनंत लोचन उघाड़िया अनंत दिखा वन हार ॥ 


2- सतगुरु तो सत्भाव है जो असभेद बताय । 

धन्य भाग धन्य शिष जेहि सो ऐसी सुधि पाय ॥ 


भजन


टेक- सतगुरु राह उधारी अगम की 

सतगुरु राह उधारी॥


1- जतन जतन जो तन मन सिरजे

सुखमण सेज संवारी । 

जागत रहे पलक नहीं लागे , 

चाखत अमल करारी ॥ 

सतगुरु राह उधारी अगम की 

सतगुरु राह उधारी॥


2- सुमति अंजन भर भर दीजे 

मिटे लहर अंधियारी । 

छूटे त्रिविध भरम भय जनका 

सहजै भई उजियारी ॥

सतगुरु राह उधारी अगम की 

सतगुरु राह उधारी॥


3- ज्ञान गली मुक्ति के द्वारे 

पिच्छम खुली किंवाड़ी । 

नौबत बाजि ध्वजा फैहराणी 

सुरत चढ़ी अटारी ॥ 

सतगुरु राह उधारी अगम की 

सतगुरु राह उधारी॥


4- हैही चाल मिलो साहेब से 

मानो कही हमारी । 

कहै कबीर सुनो भाई साधो 

चेत चलो नर नारी ।। 

सतगुरु राह उधारी अगम की 

सतगुरु राह उधारी।।


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