खेल गम से जीत जम से
साखी
1- साहिब से सब होत है बंदे से कछु नाहि ।
राई से परबत करें , परबत से राई माहि ।।
2- सांई केरा बहुत गुण औगुण कोई नाहि ।
जो दिल खोजू आपणा , सब ओगुण मुझ माहि ।।
भजन
टेक- खेल गम से जीत जम से
दाव ऐसा फेर नहीं हो साधू
बकवास कर कर जनम गंवाया
उणा पुरुष की गम नहीं।
1. सत्गुरु आया बहुत सुख पाया
ऐसी हम पर दया करी भाई ।
आप सरिखा गुरुदेव मिलें तो
करम निबेरी ( काट ) ने सायकरी ॥
खेल गम से जीत जम से
दाव ऐसा फेर नहीं हो साधू
बकवास कर कर जनम गंवाया
उणा पुरुष की गम नहीं।
2. सत्गुरुजी का देश मेरे
नोबत बाजे एक नाम की हो साधू ।
नाम निसाणा रोव्या मेरे साहेब
आदर सिघासण हेरी रहा ।
खेल गम से जीत जम से
दाव ऐसा फेर नहीं हो साधू
बकवास कर कर जनम गंवाया
उणा पुरुष की गम नहीं।
3. अष्ट कमल की सहस पांखुड़ी
उणी पंखुडी की गम करो साधू ।
उण पंखुड़ी मैं मेरे साहेब बिराजे
सूरत सुवागण अब मिली ।
खेल गम से जीत जम से
दाव ऐसा फेर नहीं हो साधू
बकवास कर कर जनम गंवाया
उणा पुरुष की गम नहीं।
4 . तेजूदास गुरु यूं क कर बोल्यो
तन बदन की खोज करी ।
राजूदास सत्गुरु का शरणे
खोज्या जाने खबर पड़ी ।
खेल गम से जीत जम से
दाव ऐसा फेर नहीं हो साधू
बकवास कर कर जनम गंवाया
उणा पुरुष की गम नहीं।
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