यो मन पामणो दिन चार
साखी
1- आस - पास जोधा खड़े , सबे बजावे गाल ।
भक्त महल ले ले चला ऐसा परबत लाल ।।
2- जो उडे सो आतमें फूले सो कुम्हलाय ।
जो चुने सो ढहि पड़े जन्मे सौ मरी जाय ॥
3- कबीर गाफिल क्यों फिरे क्यो सोता घन घोर ।
तेरे सिराने जम खड़ा ज्यूं अंधियारे चोर ।।
भजन
टेक- यो मन पामणो दिन चार , डाट्यो ना डटे रे साधू भाई ।
रोष्यो न मने रे साधू भाई ।। रोक्यो ना रूके रे साधू भाई ॥
1- छै : कुवा छै : माछली रे , साधु भाई
बाकी, सोलासौ पणिहार
निरखण वाला निरख लीजो याको करोलो विचार
रूढ्यो ना मने साधो भाई , टोक्यो ना रूके साधो भाई ॥
2- कायानगर में चोरी होई रे , साधु भाई
अब हेड़ी गयो एक लाल ।
एरण खटका छोड़के रे
नहीं फूटी दिवाल डाट्यो ना डटेरे । साधू भाई ...
3- कायानगर से हंसा उड्या रे साधु भाई
उठी चल्यो है साहूकार ।
ना जाणू वो किते गयो रे छोड्या मित्र लुवार
डाट्यो ना डटे साधु भाई ...
4- छत्रसाल सूनी पड़ी रे साधु भाई
उठी चल्यो है साहूकार ।
गादी गलिचा बिछ्या रईग्या
दो पासा ने दोसार
रूढ्यो ना मने रे साधू भाई ...
5- कहै कबीर पुकार के रे साधु भाई
सुनि जो चित लगाय ।
उठन वाला तो उठि चल्या है
बैठा करलो विचार
रोठ्यो ना मने रे साधु भाई
रोक्यो ना रूके रे साधू भाई ॥
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