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करता कर्म से न्यारा / karta karam se nyara

करता कर्म से न्यारा 


साखी


1- अनंत कोटि ब्रह्माण्ड का , एक रति नहि भार । 

साहब पुरुष कबीर है , कुल का सिरजनहार ।। 


भजन


टेक- करता कर्म से न्यारा , म्हारा साधू भाई । 

आवे न जावे मरे नहीं जन्में , ताका कर लो विचारा।।


1 . राम के पिता जो दशरथ कहिए , दशरथ किनका जाया । 

दशरथ के पिता , राम के दादा , कहो कहां से आया । 

करता कर्म से न्यारा , म्हारा साधू भाई । 

आवे न जावे मरे नहीं जन्में , ताका कर लो विचारा।।


2 . वासूदेव पिता माता रे देवकी , नंद मेंहर घर जाया । 

या को कर्ता कैसे कहिए , जो करम के हाथ बिकाया ॥ 

करता कर्म से न्यारा , म्हारा साधू भाई । 

आवे न जावे मरे नहीं जन्में , ताका कर लो विचारा।।


3 . राधा रूकमणी कृष्ण ' की नारी कृष्ण दोनों का पिया । 

सोलह सहस्त्र गोपी उन भोगी , भये काम के कीड़ा । 

करता कर्म से न्यारा , म्हारा साधू भाई । 

आवे न जावे मरे नहीं जन्में , ताका कर लो विचारा।।


4 . या में धरण गगन है सहसौ , ताका कर लो विचार ।। 

अनहद नाद शब्द धुन जागे , सोई खसम है हमारा ॥ 

करता कर्म से न्यारा , म्हारा साधू भाई । 

आवे न जावे मरे नहीं जन्में , ताका कर लो विचारा।।


5 . सदगुरु शब्द हृदय दृढ़ राखो , कर लो विवेक विचारा । 

कहै कबीर सुनो भाई साधो , सत पुरुष है अधारा ॥ 

करता कर्म से न्यारा , म्हारा साधू भाई । 

आवे न जावे मरे नहीं जन्में , ताका कर लो विचारा।।


संक्षिप्त भावार्थ - इस पद में साहब कबीर ने उनका प्रियतम पिता , खसम , करतार , जो सत्य प्राण पुरुष है जो कभी मरता नहीं उसी के बारे में विवेक विचार का संकेत करते हैं जो कि स्थापित सदगुरु शब्द को हृदय में दृढ़ता से विाचार विवेक द्वज्ञरा जुड़े रहें या मिले रहें , जो सबका आधार है ।


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