करना होय सो कर ले साधु
साखी
1- करनी करनी सब कहे , करनी माहि विवेक ।
या करनी बहि जान दे , जो नहि परसे एक ।।
2- करनी बिन कथनी कथे , गुरु पद लहे ना कोय ।
बातो के पकवान से धापा नहीं है कोय ॥
भजन
टेक- करना रे होय सो कर ले रे साधू मनक जनक दुहेलो है
लख चौरासी में भटकत भटकत , अब के मिलयो महेलो हे।।
1 . जप तप नेम वरत और पूजा, षट दर्शन को गेलो है ।
पार ब्रह्म को जानत नाहीं , सब भूल्या भूल्या भरम बहेलो है ।
करना रे होय सो कर ले रे साधू मनक जनक दुहेलो है
लख चौरासी में भटकत भटकत , अब के मिलयो महेलो हे।।
2. कोई कहे हरि बसे वैंकुठा , कोई गौ लोक कहेलो है ।
कोई कहै शिव नगरी में साहब , जुग जुग हाट बहेलो हे ।।
करना रे होय सो कर ले रे साधू मनक जनक दुहेलो है
लख चौरासी में भटकत भटकत , अब के मिलयो महेलो हे।।
3 . अण समझया हरि दूर बतावे , कोई समझया साथ कहेलो हे
सदगुरु सैण अमोलक दीनी , वो हरदम हरको गेलो है ।
करना रे होय सो कर ले रे साधू मनक जनक दुहेलो है
लख चौरासी में भटकत भटकत , अब के मिलयो महेलो हे।।
4- जीया राम गुरु पूरा म्हने मिलग्या,कोई अजपा जाप जपेलो हे
कहै बनानाथ सुनो भाई साधो , म्हारा सदगुरु जी को हेलो है ।
करना रे होय सो कर ले रे साधू मनक जनक दुहेलो है
लख चौरासी में भटकत भटकत , अब के मिलयो महेलो हे।।
मालवी शब्द
दुहेलो - कठिन
गैलो - साथ
बहेलो - बहना , डूबना
अमोलक -जिसका कोई मोल ना हो ( अनमोल )
संक्षिप्त भावार्थ - इस पद में नाथ सम्प्रदाय के श्रेष्ठ संत बनानाथ जी साहब कहते हैं जो इंसान उस परमात्मा को जो हर दम हर इंसान के अंग संग है एक है उसे यदि अन्य दूसरी जगह या दूरबताते हैं या उसे खोजने हेतु नीरथ वृत पूजा पाठ षट दर्शन के चक्कर में भरमाते हैं हर अणसमझा है । सच्चे सदगुरु यह सैन या इशारा करते हैं कि हरि परमात्मा ईश्वर अल्लाह वाहिगुरु ईशु सबके साथ हैं , सबमे मौजूद हैं ।
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