गुरु सम दाता कोई नहीं
साखी
1- सतगुरु मिले जु सब मिले , ना तो मिल न कोय ।
मात पिता सुत बाधवा , ये तो घर घर होय ॥
2- सतगुरु मिला जू जानिये , ज्ञान उजाला होय ।
भ्रम का भांडा तोड़कर , रहे निराला होय ॥
भजन
टेक- जग मांगणहारा , गुरु सम दाता कोई नहीं
कोई नहीं हो ऐसा कोई नहीं॥
1- क्या राजा रे क्या बादशाह , हो सब ने हाथ पसारा
सात द्वीप नौ खंड में सदगुरु का पसारा ॥
गुरु सम दाता कोई नहीं
2- कागज़ की ( एक ) नौका बनी , जामे लोहा अपारा
सदगुरु पार लगाविया , कोई संत पुकारा ॥
गुरु सम दाता कोई नहीं . ...
3 . अपराधी तीरथ चाल्या , क्या तीरथ तारा ?
कपट राग छूट्या नहीं , बहु अंग पखारया ॥
गुरु सम दाता कोई नहीं
4. कहें हो कबीर क्या खो गया , क्या ढूंडन हारा ?
अंधे को सूझे नहीं , थारा घट मांही उजियारा ॥
गुरु सम दाता कोई नहीं ...
संक्षिप्तभावार्थ - इस संसार में दाता सदगुरु है जिसका विस्तार पूरे विश्व में है जो हर घट में एक है । शब्दों के रूप में चा अलगलग , परन्तु उसकी अनुभूति तो निर्मलता , सहजताया एकता के घाट पर आ जाएतभी संभव है तथा अपने अंतर को दुविधा दुरमति , कपट व द्वेषता को दूर कर दें ।
आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है।
YOU TUBE - भजन वीडियो
FACEBOOK - FOLLOW
INSTAGRAM - FOLLOW
TELEGRAM - JOIN
TELEGRAM GROUP - JOIN
TWITTER - FOLLOW

0 टिप्पणियाँ