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गुरु सम दाता कोई नहीं / guru sam data koi nahi

गुरु सम दाता कोई नहीं 


साखी 


1- सतगुरु मिले जु सब मिले , ना तो मिल न कोय ।

मात पिता सुत बाधवा , ये तो घर घर होय ॥


2- सतगुरु मिला जू जानिये , ज्ञान उजाला होय ।

भ्रम का भांडा तोड़कर , रहे निराला होय ॥


भजन 


टेक- जग मांगणहारा , गुरु सम दाता कोई नहीं

कोई नहीं हो ऐसा कोई नहीं॥


1- क्या राजा रे क्या बादशाह , हो सब ने हाथ पसारा

सात द्वीप नौ खंड में सदगुरु का पसारा ॥ 

गुरु सम दाता कोई नहीं 


2- कागज़ की ( एक ) नौका बनी , जामे लोहा अपारा

सदगुरु पार लगाविया , कोई संत पुकारा ॥

गुरु सम दाता कोई नहीं . ... 


3 . अपराधी तीरथ चाल्या , क्या तीरथ तारा ? 

कपट राग छूट्या नहीं , बहु अंग पखारया ॥ 

गुरु सम दाता कोई नहीं 


4. कहें हो कबीर क्या खो गया , क्या ढूंडन हारा ? 

अंधे को सूझे नहीं , थारा घट मांही उजियारा ॥ 

गुरु सम दाता कोई नहीं ... 


संक्षिप्तभावार्थ - इस संसार में दाता सदगुरु है जिसका विस्तार पूरे विश्व में है जो हर घट में एक है । शब्दों के रूप में चा अलगलग , परन्तु उसकी अनुभूति तो निर्मलता , सहजताया एकता के घाट पर आ जाएतभी संभव है तथा अपने अंतर को दुविधा दुरमति , कपट व द्वेषता को दूर कर दें । 


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