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होशियार रेहना रे / hoshiyar rehna re

होशियार रेहना रे


साखी


1- सब जग सूता नींद भरि , मोहे न आवे नींद । 

काल खड़ा है बारनै ( ज्यो ) तोरण आया बिंद ॥


2- चहुदिश खड़े सुरमा , हाथ लिये हथियार । 

सब ही यह तन देखतां , काल ले गया मार।।


भजन


टेक- जागृत रेहना रे नगर में चोर आवेगा

होशियार रेहना रे नगर में चोर आवेगा

चोर आवेगा एक दिन , जम ( काल ) आवेगा॥

होशियार रेहना रे नगर में चोर आवेगा


1 .तीर तोप तलवार ना बरछी , ना बंदूक चलावेगा । 

आवत जात नज़र नहीं आवे , भीतर घुम घुमावेगा ।

होशियार रेहना रे नगर में चोर आवेगा

2- गढ़ नहीं तोड़े , किला नहीं फोड़े ना कोई रूप दिखावेगा । 

इस नगर से कोई काम नहीं वो तुझे पकड़ ले जावेगा ।।

होशियार रहना रे नगर में चोर आवेगा


3- धन दौलत और माल खजीना , यहीं धरा रह जाएगा ।

भाई बन्धु और कुटुम्ब कबीला , खड़े देख रह जाएगा ।

होशियार रहना रे नगर में चोर आवेगा


4 . मुट्ठी बांध कर आया रे बंदे , हाथ पसारे जाएगा । 

कहै कबीर सुनो भाई साधो , करनी का फल पाएगा । 

होशियार रहना रे नगर में चोर आवेगा


मालवी शब्द 

जम - यम या मृत्यु के देवता , 

काल - अंतिम , समय , मृत्यु , यमराज , 

कुटुंब- पविार ,खानदान , 

कबीला - समूह , झुंड , एक गोत्र के सभी लोग , 

वीराना- उजाड़ जगह , जिसमें कोई आबादी न रही हो , 

पसारे - फैलाए


संक्षिप्त भावार्थ - सदगुरु कबीर ने जागृत रहने का संदेश दिया है जिसमें  मानव के जीवन पता नहीं कब काल की सवारी आजाए और वह इस  काया या तन रूपी बंगले के बिना टूट फूट के उस जीवात्मा को ले जाएगा  और संसार की सभी वैभवशाली वस्तुएं धन - दौलत व परिवारगण सब  | यही रह जाएंगे । इसलिए यहाँ रहते हमनकी के साथ जीवन को बसर करते  हुए मानव सेवा पीड़ित व दीन दुखियों की जितनी हो सके सेवा करें ।


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