Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

गगन पर देश हमारा / gagan par he desh hamara

गगन पर देश हमारा


साखी 


1- आग लगी आकाश में , झर - झर पड़े अंगार ।

कहै कबीर उठ जागरे , जलन लगा संसार ।। 


2- झाल उठी झोली जली , खपरा फूटम फूट । 

जोगी था सो रमी रहा , आसन रही भभूत ।। 


भजन


टेक- गगन पर देश हमारा चले तो साहेब मिल जाय॥


1 . पांचों तत्व तीन गुण नीचा तापर अलख लखाय । 

तीन लोक पर अमर अखाड़ा काल भी डर जाय ॥ 

गगन पर देश हमारा चले तो साहेब मिल जाय॥


2 . भणिया गुणिया दोनू थकिया समझोड़ा उलजाय । 

सरग नरग की गैल में फिर फिर गोता खाय ॥ 

गगन पर देश हमारा चले तो साहेब मिल जाय॥


3 . निराकार आकार नहीं है सिरगुण निरगुण नाय । 

चवदा लोक अगम के आगे हंस रहा लिपटाय ॥ 

गगन पर देश हमारा चले तो साहेब मिल जाय॥


3 . रामानन्द मोय सतगुरु मिलिया दीना भेद बताय । 

कहै कबीर सुनो भाई साधु आवागमन मिट जाय । 

गगन पर देश हमारा चले तो साहेब मिल जाय॥


आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है। 


YOU TUBE    -     भजन वीडियो

FACEBOOK   -     FOLLOW

INSTAGRAM  -    FOLLOW

TELEGRAM    -     JOIN

TELEGRAM  GROUP  -  JOIN

TWITTER       -     FOLLOW

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ