अवधू मन बिन करम न होता
साखी
1- सकल पसारा पवन का , सात द्वीप नौ खण्ड ।
सोहम् नाम उस पवन का , जो गरजे ब्रह्मण्ड ।।
2- स्वांगी सब संसार है , साधू समझ अपार ।
अलल पंछी कोई एक है , पंछी कोटि हजार ।।
भजन
टेक- अवधू मन बिन करम न होता
धर नहीं गिगन नहीं होता हम तुम दोनू कुण था।
1 . आप अलख अंदर होई बैठा बून्द अमी रस छूटा ।
एक बूंद का सकल पसारा परछ परछ होई झूठा ॥
2 . मात पिता मिल भेले होया करी करम की पुजा ।
पहले पिता अकेला होता पुत्र जनमिया दूजा ॥
3 .सात कुली सायर आठ कुली परबत नोंकुली नाग नहीं होता ।
अठारा करोड़ बनसपत नहीं था , कलम काई की करता ॥
4 . ब्रह्मा नहीं था विष्णु नहीं था नहीं था शंकर देवा ।
कहै कबीर मंडप नहीं था मांडन वाला भेजा ।
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