बेगम की गम कर ले
साखी
1- अगम पंथ को मन गया , सुरति भई अगुवान ।
तहाँ कबीरा मंडि रहा , बेहद के मैदान ॥
2- बेहद अगाधी पीव है , ये सब हद के जीव ।
जो नरराते हद सौ , कभी ना पावे पीव ॥
भजन
टेक- बेगम की गम कर ले रे हंसा , बेगम की गम कर रे ।
विगत करो बेगम में रेवो , जनम मरण को नहीं डर है , रे हंसा
बेगम की गम कर ले रे हंसा , बेगम की गम कर रे ।
1 . नाभी द्वादस है नहीं उनके , ना कोई धरणी धर रे ।
जाप अजपा है नहीं उनके , तो सुमरण किनका कर रे हंसा ॥
बेगम की गम कर ले रे हंसा , बेगम की गम कर रे ।
2 . बिना धरण एक रहट चलत है , बिन बादल बिन जल रे ।
बिना आमर अमीरस बरसे , वही अमी पिया कर रे , रे हंसा ॥
बेगम की गम कर ले रे हंसा , बेगम की गम कर रे ।
3- ब्रह्मा रे विष्णु महेश्वर देवा , तीनों आवागमन रे ।
उस अक्षर को लघु ना मात्रा , वही शबद रटा कर , रे हंसा ॥
बेगम की गम कर ले रे हंसा , बेगम की गम कर रे ।
4 . वठे गयोड़ा फेर नहीं आया , ऐसा अवसर कर रे ।
कहें कबीर सुनो भाई साधो , उसी देश घर कर रे हंसा ॥
बेगम की गम कर ले रे हंसा , बेगम की गम कर रे ।
मालवी शब्द
वठे - वहाँ ,
गयोड़ा गया हुआ
विगत - खोज
रहट - पानी निकालने का साधन
संक्षिप्त भावार्थ - वह निर्लिप्त अखंड - अविनाशी शब्द जो लघु मात्रा से रहित है जिसको जाप व अजप्पा में नहीं बांधा जा सकता है , जिसका स्थूल - बाह्य घेरे बंधन से मुक्त है । साहब कबीर उसी के बोध का संकेत करते हैं ।
आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है।
YOU TUBE - भजन वीडियो
FACEBOOK - FOLLOW
INSTAGRAM - FOLLOW
TELEGRAM - JOIN
TELEGRAM GROUP - JOIN
TWITTER - FOLLOW

0 टिप्पणियाँ