जाजो जाजो रे
साखी
1- संत सुरसरी गंगजल आनि पखार अंग ।
मैले से निर्मल भए , साधुजन के संग ।
2- सत संगति सबसे बड़ी बिन संगत सब ओस ।
सत संगति परमान्तर कटे करम का दोस ।।
भजन
टेक- जाजो जाजोरे , भाई म्हारा जाजो , इणा समंदर पार ।
मोतीड़ा लाजोरे साधो , अणबीन्दिया , हो जी ।
मोती मिल गया रे , हीरा मिल गया म्हाने लख दोई चार
मन का मोतीरे साधो , ना मिल्या , हो जी।।
1 . उड़ गयी उड़ गयी रे , इना बन की चिड़िया
अपना मंदरवासा फिर किया जी ॥
जाजो जाजोरे , भाई म्हारा जाजो
2 . मिल लो मिल लोरे , भाई म्हारा मिल लो ।
लंबी बांह पसार , अब के बिछड़या रे साधो , कद मिलांजी ।
जाजो जाजोरे , भाई म्हारा जाजो
3 . फाट्या फाट्या रे भाई म्हारा फाट्या
सूर्या गाय का दूध । जामण , दूध फाटे से ना जमे हो जी ।
जाजो जाजोरे , भाई म्हारा जाजो
4 . पड़ गयी पड़ गयी रे भाई म्हारा पड़ गयी
इना मायला में गांठ ।
डोरी टूटे रे गांठण , ना छूटे हो जी ।
जाजो जाजोरे , भाई म्हारा जाजो
5 . बोल्या बोल्या रे , भाई म्हारा बोल्या
बोल्या धुरू ने प्रहलाद ।
जुग जुग मिलो नी इना साधू का हो जी ॥
जाजो जाजोरे , भाई म्हारा जाजो
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