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बेगम देस हमारा / begam desh hamara

बेगम देस हमारा


साखी 


टेक- हद छोड़ बेहद गया , रहा निरंतर होय । 

बेहद के मैदान में , रहा कबीरा सोय ॥ 


2- हद छोड़ बेहद गया , ताखो राम हजूर । 

पारब्रह्म परचै भया , अब नियरै तब दूर । 


भजन


टेक- बेगम देश हमारा रे हंसा 

बेगम देश वेद से न्यारा , वां नहीं काल पसारा॥


1 . राजा रंक फ़कीर बादशाह , सबको करूँ मैं पुकारा ।

जो तुम आओ परम धाम से , वाही लोक हमारा ॥

बेगम देश हमारा रे हंसा 

बेगम देश वेद से न्यारा , वां नहीं काल पसारा॥


2 . धरण गगन जल पवन ना पानी , चांद सूरज नहीं तारा । 

बिन महताब होवे उजियाला , साहिब के दरबारा ॥ 

बेगम देश हमारा रे हंसा 

बेगम देश वेद से न्यारा , वां नहीं काल पसारा॥


3 . जो तुम आओ हल्का होकर , तजो मान का भारा ।

ऐसी रहणी रहो मेरे अवधू , उतरो भवजल पारा ॥ 

बेगम देश हमारा रे हंसा 

बेगम देश वेद से न्यारा , वां नहीं काल पसारा॥


4 . लोक लाज कुल कारण मेटो , लीजो शबद टकसारा ।

कहै कबीर सुनो मेरे अवधू उतरो भवजल पारा ॥ 

बेगम देश हमारा रे हंसा 

बेगम देश वेद से न्यारा , वां नहीं काल पसारा॥


मालवी शब्द 

मेहताब - दिया सलाई 

काठ - लकड़ी 

परवाण - पत्थर 

बेगम - बिना शोक के ( शोक रहित ) 

पसारा - फैलाव


संक्षिप्त भावार्थ - निर्विकार निर्गुण जो वेद शास्त्रों से न्यारा है जहाँ काल का पसारा नहीं है । जिसमें इस भौतिक रीति - रिवाज मान - अभिमान को दूर कर सत्य शब्द पी टकसार साहब कबीर लखाते हैं । 


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