मना रे भाई जमी आसमान
भजन
टेक- मना रे भाई जमीं आसमान जुगत कर थरपो
आकाश है वाबिच गैला हो जी
परले करेगा पृथमी कोराजा , जद सांई म्हारो सांच
मना रे भाई मकरन की जो होजी
1- मकर करया से थारी भक्ति हीन होई जावे हो
मेवाड़ीलाल शील ने सन्तोष होय ने रीजे हो
भक्ति करो ऐसी करनी कमावो
जद गुरु ने गोविंद दोई रीजे
मनारे भाई मकर न कीजे हो हो हो ...
2- मनारे भाई भूली ग्यो संसार मालिक थारी लिवल्या
दुनिया में पाप पतीजे हो
इणी कुबजा का संग में कलिंगडयो
बिराजे जद आपो घटे न तन सीजे
मना रे भाई मकरन कीजे हाँ
3- मना रे भाई माणक दान अमोलक मोती
जरना जरेवाके दीजे हो ...
मनक जमारो जागीरो रो पायो
जद हरक हरक पायल रीजे
मनारे भाई मकरन कीजे रे
मकर करया से थारी भक्ति हीन होई जावे हो
मेवाड़ी जाय शील रे संतोष होई ने रीजे हो ।
भक्ति करे ऐसी करनी कमायो
जद गुरु ने गोविंद दोई रीजे
मनारे भाई मकरन कीजे हो ।
4- मनारे भाई जद रणुकार उठाय ( मचेगा )
काया तन में तो गुरुजी का संग में रमीजे हो ...
भवानी नाथ जोगी संग है भरमणा
जद हरक हरक प्याला पीजे
मना रेभाई मकरन कीजे हो ।
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