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अनघड़िया देवा / anghadiya deva

अनघड़िया देवा 


साखी


1- शुन्न सरोवर मीन मन , नीर निरंजन देव । 

सात समुद्र सुख बिसारिया , बिरला जाने भेव ।। 


भजन


टेक- अनघड़िया देवा , कौन करेगा थारी सेवा

कोई नी करेगा थारी सेवा अनघड़िया देवा

कौन करेगा थारी सेवा ॥


1- घड़िया घाट को सब कोई धावे , नित उठ लावे सेवा ( मेवा ) 

पूरण ब्रह्म अखंडित स्वामी , जिनको जाणे ना कोई भेवा ।।

अनघड़िया देवा , कौन करेगा थारी सेवा


2 . ब्रह्मा , विष्णु , महेश्वरदेवा , उन सिर लागी काई । 

इनके भरोसे कोई मत रहिये , इन्होंने मुक्ति न पाई । 

अनघड़िया देवा , कौन करेगा थारी सेवा


3 . दस अवतार निरंजन कहिए वो अपणा नहीं होई । 

वो तो अपनी करनी भोगे , कर्ता और ही कोई ॥ 

अनघड़िया देवा , कौन करेगा थारी सेवा


4 . जोगी जती और सती संन्यासी , आप आप में लड़िया । 

कहै कबीर सुनो भाई साधो , शब्द लखे सो तरिया ॥ 

अनघड़िया देवा , कौन करेगा थारी सेवा


शब्द सूची 

भेवा - भेद 

अनघडिया - जो घड़ने में नहीं आता है ।


संक्षिप्त भावार्थ - सदगुरु कबीर अनघड़िया चेतन पुरुष की सेवा हिफाजत जो घड़े हुए में मौजूद हैं करने का संकेत करते हैं । मानव शरीर रूपी मंदिर , मस्जिद , गुरुद्वारे में वह चेतन पी नूरथा रूह सभी में समान रूप से विद्यमान है । अतः हर घट की हर जीव की रक्षा सुरक्षा करने का इंसान करते हैं जिसे विभाजित , खंडित या बांटा नहीं जा सकता । अतः शब्दों को विवेक - विचार कर प्रत्याक्षानुभूति करें ताकि आपसी झगड़ा , दूरियाँ , कटुता दूर हो सके । 


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