संकल्प हो हमारा
साखी
1- सबै हमारे एक हैं जो सुमरै हरिनाम ।
वस्तु लही पिछाण के बासण से क्या काम ॥
भजन
टेक- संकल्प हो हमारा इन्सान हम बनेंगे ।
इन्सान बन गए तो भगवान ही बनेंगे ।
1 . हम एक ही गगन के चमके हुए सितारे ।
लगते हैं कितने प्यारे , हँसते रहे हँसेगे ।
संकल्प हो हमारा इन्सान हम बनेंगे ।
इन्सान बन गए तो भगवान ही बनेंगे ।
2 . हम एक ही चमन के हैं फूल न्यारे न्यारे ।
लगते हैं कितने प्यारे , खिलते रहे खिलेंगे ।
संकल्प हो हमारा इन्सान हम बनेंगे ।
इन्सान बन गए तो भगवान ही बनेंगे ।
3 . हो बौद्ध जैन मुस्लिम हिन्दू हो या ईसाई ।
आपस में भाई भाई सबके गले मिलेंगे ।
संकल्प हो हमारा इन्सान हम बनेंगे ।
इन्सान बन गए तो भगवान ही बनेंगे ।
4 . मंदिर तो एक ही है दीपक है न्यारे - न्यारे ।
लगते हैं कितने प्यारे , जलते रहें जलेंगे ।
संकल्प हो हमारा इन्सान हम बनेंगे ।
इन्सान बन गए तो भगवान ही बनेंगे ।
5 . बीजक कुरान आगम गुरुगम और कृष्ण गीता ।
इंसानियत की गाथा हम प्रेम से पढ़ेंगे ।
संकल्प हो हमारा इन्सान हम बनेंगे ।
इन्सान बन गए तो भगवान ही बनेंगे ।
संक्षिप्त भावार्थ - इस पद में एक समदृष्टवा कहते हैं कि हम केवल इन्सान बन जाएँ । क्योंकि इस संसार रूपी बगीचे में जो अनेक प्रकार के फूल हैं सभी सुन्दर हैं जो खिल रहे वह एक ही गगन के लिए हँसते हैं चाहे वे किसी भी धर्म मजहब के हो चाहे किसी भी लखिक ग्रंथ से शिक्षा ली हों , क्योंकि सभी ग्रंथों , शाखों में इंसानियत का ही पाठ व सन्देश है ।
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