तम्बूरा सुणले साधो भाई
साखी
1- कबीर जंत्रन बाजई , टूट गए सब तार ।
जंत्र बिचारा क्या करे , चला बजावन हार ।।
भजन
टेक- तम्बूरा सुणले साधो भाई
तेरा किया करम कटजाई
तेरी लख चौरासी मिटजाई
तम्बूरा सुणले साधो भाई।।
1 . परथम गुणपत देव ने सुमरां ने सुमरां शारद माई ।
दर्शन देओ गुरु परषण होजो , हिरदे हिम्मत आई ।
तेरा किया करम कटजाई
तेरी लख चौरासी मिटजाई
तम्बूरा सुणले साधो भाई।।
2 . पांच तत्व का बनारे तम्बूरा , तीन गुण तार मिलाई ।
ओहं सोहं रटने को लागा ' , निर्गुण राह बतलाई ॥
तेरा किया करम कटजाई
तेरी लख चौरासी मिटजाई
तम्बूरा सुणले साधो भाई।।
3 . आप रमीजा आरंभ रचिया , रचियो घाट घट माई ।
गगन मण्डल में थारो बाजे रे तम्बूरो , दशमें द्वार ठहराई ।
तेरा किया करम कटजाई
तेरी लख चौरासी मिटजाई
तम्बूरा सुणले साधो भाई।।
4 . अनघड़ सुधा घड़ियो तम्बूरो , घड़ियो घाट घट माही ।
रुणझुण 2 बाजे रे तम्बूरो , इणी बंकनाल केरा माई ।
तेरा किया करम कटजाई
तेरी लख चौरासी मिटजाई
तम्बूरा सुणले साधो भाई।।
5 . साहब कबीर ने गायो तम्बूरो सब संतन केरा माई ।
ज्ञान गरीबी पायो तम्बूरो ' , संत समझण घर आई ।
तेरा किया करम कटजाई
तेरी लख चौरासी मिटजाई
तम्बूरा सुणले साधो भाई।।
मालवी शब्द
परथम - प्रथम , पहले
सुमरा - सुमरन , वाद
परपण - खुश , प्रसन्न
रमीजा - रमना , वहना , खेलना
संक्षिप्त भावार्थ - साहब कबीर ने तन रूपी तंबूरे ( जो पांच तत्व तीन गुण से मिलकर बना ) को सुनने की बात कही , जिसमें हमेशा झीणी झीण , रूनझुन की आवाज़ होती है जिसको सुनने से किये कर्म करे तथा बाहर की वृत्ति से पलटकर हम अपनी ओर मुड़ जाएँ व वह अनघड़ जो सब में व्याप्त है का बोध हो सके । इस प्रकार इस निर्गुण राह की सैण को शब्द द्वारा लखाने का प्रयास किया है ।
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