Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

पीले अमिरस धारा / pile amiras dhara

पीले अमिरस धारा


साखी


1- अमृत कैरी मोटरी  दीनी सद्गुरु खोल ।

आप सरीखा जो मिले ताहि पिला दे घोल।।


2- अमृत पीवे तेजना सद्गुरु लागा कान ।

वस्तु अगोचर मिल गई मन नही आवे आन।।


भजन


टेक - पीले अमिरस धारा गगन में झड़ी लगी ।

झड़ी लगी हा झड़ी लगी 

पीले अमिरस धारा गगन में झड़ी लगी।।



1.बूंद का प्यासा घड़ा भर पाया 

 सपने में वो स्वाद न आया ।

 कहो किसे कैसे समझावे 

एक बूंद की तरण लगी ।

पीले अमिरस धारा गगन में झड़ी लगी ।


 2.प्यास बिना क्या पीवेरे पानी 

प्यासे के लिए है वो पानी ।

बिना अधिकारी कोई नहीं जाणी 

अमृत रस की झड़ी लगी ॥ 

पीले अमिरस धारा गगन में झड़ी लगी ।


3.अमीरस पीवे अमर पद पावे 

भव योनि में कबहू न आवे ।

 जरा - मरण का दुःख नसावे

घटकी गगरिया भरण लगी 

पीले अमिरस धारा गगन में झड़ी लगी ।


4.बून्द अमीरस गुरूजी की वाणी 

 जीवन रस्ता है यह पाणी।

कबीर संगत में हो हमारी 

डाली प्रेम की हरी भरी।।

पीले अमिरस धारा गगन में झड़ी लगी ।


संक्षिप्त भावार्थ - हर इसान के गगन मण्डल से हमेशा ज्ञान की समझ की अमृत रूपी झड़ी रहती है । उसे हम कितना पान कर पाते है हमारे ऊपर निर्भर करता है । उस क्षुधा  प्यास के मरम को जो प्यासा  होता है वही जलता है , भूखा भूख के एहसास को , प्यास बूद के मरम को जानता है,जो प्यासा ना हो ,वह प्यास व भूख के मरम को नहीं जान सकता ।जिन्होने सन्तो की वाणी रूपी प्रेम का ,मरम का रस पीया जो हर मानव के जीवन का रास्ता है ,दरशन है ।


आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है। 


YOU TUBE    -     भजन वीडियो

FACEBOOK   -     FOLLOW

INSTAGRAM  -    FOLLOW

TELEGRAM    -     JOIN

TELEGRAM  GROUP  -  JOIN

TWITTER       -     FOLLOW





एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ