Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

निर्गुण सेरी बड़ी सांकड़ी / nirgun seriya badi sakdi

निर्गुण सेरी बड़ी सांकड़ी


साखी 


1- शब्द सुरति के अंतरे अलख पुरुष निरबान ।

लखने हारे लखि लिया , जा को है गुरु ज्ञान ।।


भजन


टेक- निर्गुण सैरी बड़ी सांकड़ी म्हारी हेली

वां तो चढ़यो नहीं जाय 

चढ़ी जावां तो पिव मिले म्हारी हैली

जीव अमर होई जाय 

बावरी वो कदे चलांगा गुरु का देश

गया पुरुष नहीं आया है । 

चढ़ी जावां ने ( यदि ) गिर पड़ाँ

तो जीव अकारत जाय॥

बावरी वो कदे चलांगा गुरु का देश

गया पुरुष नहीं आया है । 


1. हेली म्हारी कई तो उगे ने कईं आथमे

कई उजाला होय । 

यां तो उगे ने यहाँ आथमे , ने यांही उजाला होय ॥ 

बावरी वो कदे चलांगा गुरु का देश

गया पुरुष नहीं आया है । 


2 . हेली म्हारी कां तो उमगे और कां बरसे

और कां सूखा का हरिया होय । 

यां तो उमगे ने यां बरसे

और यांज सूखा का हरिया होय ॥ 

बावरी वो कदे चलांगा गुरु का देश

गया पुरुष नहीं आया है । 


3. हेली म्हारी अनहद का बाजार मेरे

हिरा को बेपार है ।

सुगरा माणस सौदा करि चल्या

नुगरा तो मूल गमाय ॥

बावरी वो कदे चलांगा गुरु का देश

गया पुरुष नहीं आया है । 


4 . हेली म्हारी कंचन धातु जहाँ निपजे

वां म्हारा साहिब की सैज है ।

कहै कबीर सुणो भाई साधो

नहीं तो मरे ना बूढ़ा होय ॥

बावरी वो कदे चलांगा गुरु का देश

गया पुरुष नहीं आया है । 


संक्षिप्त भावार्थ - कबीर साहब इस निर्गुण , अध्यात्मिक राह को दर्शाते हैं जो इसी मानव जीवन में व्याप्त है । इसी प्रकृति में इसको देखना है , चुनना है और उस अनमोल हीरकी मणि की हिफाजत , सुरक्षा करना है , जिसका कभी अस्तित्व खतम नहीं होता है , जो अमर है ।


आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है। 


YOU TUBE    -     भजन वीडियो

FACEBOOK   -     FOLLOW

INSTAGRAM  -    FOLLOW

TELEGRAM    -     JOIN

TELEGRAM  GROUP  -  JOIN

TWITTER       -     FOLLOW

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ