मुसाफिर जाना पड़ेगा
साखी
1- आया है सो जाएगा राजा रंग फकीर ।
कोई सिंहासन चढ़ चले , कोई बंधे जंजीर।।
2- मन मुरीद संसार है , गुरू मुरीद कोई साध ।
जो माने गुरू वचन को , ताका मता अगाध ।।
भजन
टेक- ऐ मन मुसाफिर तुझको जाना पड़ेगा
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
करना पड़ेगा तुझको मरना पड़ेगा
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
ऐ मन मुसाफिर तुझको जाना पड़ेगा
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
1- भाड़े की कुटिया को क्या तू सम्भाल
आएगा घर का मालिक तुझको निकाले ।।
उसका भी किराया भरना पड़ेगा
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
ऐ मन मुसाफिर तुझको जाना पड़ेगा
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
2- आऐगा नोटिस जमानत न होगी
पल्ले तुम्हारे अमानत न होगी
होकर के कैद तुझे जाना पड़ेगा ।
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
ऐ मन मुसाफिर तुझको जाना पड़ेगा
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
3- यम राजा की अदालत चढ़ोगे
पूछेगा हकीकत जवाब क्या दोगे
उनसे तो सिर को झुकाना पड़ेगा ।।
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
ऐ मन मुसाफिर तुझको जाना पड़ेगा
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
4- हमरी न मानो यमराज मनाएगा
तेरा किया करम तुझको भोगाएगा
पापों की अग्नि में जलना पड़ेगा ।
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
ऐ मन मुसाफिर तुझको जाना पड़ेगा
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
5- कहै कबीर सा फिरेगा तू रोता
लख चौरासी में खाएगा गोता
फिर -2 जनम तुझको मरना पड़ेगा ।
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
ऐ मन मुसाफिर तुझको जाना पड़ेगा
काया कुटी खाली करना पड़ेगा ।
मालवी शब्द-
मुसाफिर - जिसका कोई स्थाई घरबार या आश्रय ना हो ।
भाड़े - किराये
संक्षिप्त भावार्थ - इस चितावनी शब्द में कबीर साहब ने इस शरीर रूपी किराये के मकान को खाली करना पड़ेगा तथा इसका किराया भी देना पड़ेगा । जिस दिन काल का बुलावा आएगा तेरी कोई जमानतदार नहीं होगा । अत जमानत के लिए सतकाम की सतनाम की पूंजी इकट्ठी कर ले यह तभी संभव होगा जब तेरी करनी अच्छी होगी । अन्यथा इसी प्रकार अनेक विषय वासना दुराचरण दुर्व्यसन में फसता हुजा आवागमन के चक्कर में पड़ा रहेगा ।
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