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किन कारण आयो जगत में , kin karan aayo re jagat me

किन कारण आयो जगत में


साखी


1- कबीर वा दिन याद कर

 पग ऊपर तले शिष ।

मृत्युमण्डलम आयकर

 बिसर गया जगदीश


भजन


टेक- किन कारण आयो रे जगत में

कई सरू आयो

थोड़ो गुरु को सुन  उपदेश रे गेल्या

किन कारण आयो ।।


1 . माँ का गरब में उल्टो रे टंगियो

ने वाँ तूने वादो कियो

भजन तुम्हारा करूंगा मैं साहिब

पक्का कोल कियो ।

किन कारण आयो रे जगत में 

कई सरू आयो

थोड़ो गुरु को सुन  उपदेश रे गेल्या

किन कारण आयो ।।


 2 . बालापन थने खेल में खोयो ने

भर ज्वानी में सोयो

बूढो भयो जद रोग ने घेरयो

सिर धुन पछताया ।

किन कारण आयो रे जगत में

कई सरू आयो

थोड़ो गुरु को सुन  उपदेश रे गेल्या

किन कारण आयो ।।


3 . नदी किनारे थाने बाग लगायो

गाफ़िल होई सोयो

चुन चुन चिड़िया सब फ़ल खायो

हाथ मसल रोयो ।।

किन कारण आयो रे जगत में 

कई सरू आयो

थोड़ो गुरु को सुन  उपदेश रे गेल्या

किन कारण आयो ।।


4 . साहेब कबीर भजो नाम सदारे

हरजन ने गायो 

जनम जनम की कीट कटे

जद सत्नाम पायो ॥

किन कारण आयो रे जगत में 

कई सरू आयो

थोड़ो गुरु को सुन  उपदेश रे गेल्या

किन कारण आयो ।।


मालवी शब्द 

कोल - वादा 

कोट - जग


संक्षिप्त भावार्थ - इस चेतावनी पद में साहब ने हमारे ऊपर जो अनेक प्रकार के आवरण कीट या जंगचढ़ा रखा है उन्हें दूर कर सतकाम सदज्ञान रूपी वादे को पूर्ण करें जो मानव जीवन की सार्थकता है । 


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काई कारण आयो रे जगत में

Kai karan aayo re jagat me

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