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कोई मत छेड़ो रे / koi mat chhedo re

कोई मत छेड़ो रे 


साखी 


1- मारग कठिन कबीर का , धरिना सके पग कोय ।

आय चले कोई सुरमा , जाके धड़ पर शीष ना होय ॥


2- रण जंग बाजा बाजिया सुरा आए धाय ।

सूरा सो वो लड़त है , कायर भागे जाय ॥


भजन


भजन


टेक- कोई मत छेड़ो रे , यार हमें कोई मत छेड़ो रे

मैं तो दीवाना नाम ( भजन ) का , मुझे कोई मत छेड़ो रे

तुम दूर खड़े रो रे , यार तुम अलग खड़े रो रे

सत्य ( गुरु ) का शमशेर हाथ में मार बैठूँगा रे॥


1 . हाथी के इनसाफ़ से मैंने बाघ ( शेर ) को घेरा रे

इसी को फिरता ढूंढता मैं , बन बन पुकारूँ रे

मैं तो दीवाना नाम का ...॥


2 . मैंने अपना घर तो झाल ( झाड़ ) लिया , औरन का झाडू रे 

जो कोई आता मुझे ढूंढता , मैं उसी को तारूं रे

मैं तो दीवाना नाम का ...॥


3 . पूरण प्याला प्रेम का यह अगम से आया रे

भर पिया कबीर ने , कमाल को पाया रे

मैं तो दीवाना नाम का ...॥


मालवी शब्द 

शमशेर - तलवार 


संक्षिप्त भावार्थ - इस पद में साहब कहते हैं कि हमने अपनाघर झाललिया साफ एकदम चकाचक कर लिया अब सभी के घर को भी साफ करने की कोशिश करते है , यह तभी होगा जब पूरण प्याला प्रेम का दया का सदभाव का पीवे । और सतकाम सदज्ञान व नाम के दिवाने बन जाएं ।


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