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दादू और कबीर / dadu or kabir

दादू और कबीर 

आदरणीय दादू साहिब प्रकरण

सतगुरु कबीर साहिब के चरणों में वंदना करते हैं

आज सेवा और समर्पण किसे कहते हैं चर्चा करते हैं

आदम की आयु घटे

          जब यम घेरे आय

सुमिरन किया सत्य कबीर का

         दादू लिया बचाएं

आदरणीय दादू साहिब एक गृहस्थ जीवन व्यतीत करते थे

सद ग्रंथ उठाकर देखो सतगुरु कबीर साहिब ने बहुत सी हस्तियों को दर्शन देकर

सत्यलोक सत्य धाम में दर्शन कराई |

दादू साहिब अंतर्मुखी भजन अभ्यास करते थे |

दिन में अपना कारोबार संभालते थे

उनकी एक पान की दुकान थी

उस पर पान लगाकर बेचते थे |

जैसे धर्मदास को दर्शन दिए

इसी प्रकार दादू को भी दर्शन दिए |

कबीर साहिब दादू की पान की दुकान पर पहुंचे

दादू से कहा की हमें आपसे एक पान खाना है |

दादू में महात्मा के लिए एक पान बनाया

दादू कबीर साहिब को नहीं जानते थे

वह कहां रहते हैं और उनका रूप रंग क्या है ?

यह करनी का भैदहै

         नहीं बुद्धि विचार

कथनी छोड करनी करे

        जब पावै दीदार

अंत में दादू ने जब सतगुरु को पान दीया

साहिब ने मुंह के अंदर डाला

और दादू से कहा की दादू पान की पीच कहां पर डालूं

दादू के अंतर पाठ खुल गए साहिब को देखकर

दादू के मुख से निकला की साहिब यह पान की पिच मेरे मुंह में डालो

कबीर साहिब ने कहा खोलो मुंह

दादू ने जैसे मुंह खोला

कबीर साहिब ने मुंह मुंह मैं पी मारी

दादू साहिब वहीं पर गरीब दास साहिब की तरह अंतर्ध्यान हो गये

दादू साहिब नै  उसी समय सतगुरु कबीर साहिब की अनंत वाणईईका उल्लेख किया |

आज मैंने दादू के विषय में उल्लेख किया इस पर विचार करना |

संत मैं और संसार में बहुत अंतर है

संतो की भाषा संसार से अलग बयान करती है

ग्रुप के सभी सदस्यों को सप्रेम साहिब बंदगी साहिब बंदगी

सत्यपाल पानीपत

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