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 " पाँच बरस की मीरा लाड़ली "

साखी - 1 . मीरा ने सुण यूँ कही और सुण राणा मोरी बात 

अरे साधु माय ने बाप है और में संतो के साथ 


2 . मीरा बन की लाड़ली और राणो बन को ठूंठ 

समझायो समझयो नहीं नि तो ले जाती बैकुंठ 


भजन 


पांच बरस की मीरा लाड़ली सखियों में खेलन जाय 

सुण राणा जी 

खेले तो पाया री मीरा कंगणा हो जी 


1. काले काले नाग पिटारे राणा मुंगता 

हो दिए मीरा बाई के हाथ दिए बैरागण के हाथ 

खोल खुलैया मीरा देखती वा में बैठे है जोहरी नाग 

मेरी लव लागि हर के नाम से 


2. विष के तो प्याले राणा घोलता दिए मीरा बाई के हाथ 

खोल खुलैया मीरा देखती ले चरणामृत मीरा पि गयी 

हो वा के निर्मल हुए है शरीर मेरी लव लागि हर के नाम से जी 


3. ऊँचे तो चढ़के राणा देखता मीरा मरी है के नाय 

पांव बजावे मीरा घुंघरू हाथो करताल 

मुख से बजावे मीरा बांसुरी वो तो गावे छत्तीसों राग 

मेरी लव लागि हर के नाम से

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