भजन
टेक- पढ़ो सुगना सतनाम बैठ तन ताक में
चार दिना को रंग मिले तन खाक में ॥ टेर ॥
1- लावत अतर फुलेल काया है चाम की ॥
अरद उरद मिल जाय दवाई सतनाम की ॥१ ॥
2- कहाँलाई संसार कहांले जायेंगे ।
निश दिन रहे अचेत तमाचा खायेंगे || २ ||
3- यह गुदड़ी गलतान सदा गल जायेंगे ।
राजा रंक वजीर सबै चल जायेंगे |
4- चेतहुं काहे न सबेरे जमसों रारि है ।
काल के हात गिलोल ताड़ेका मारि है ॥४ ॥
5- माला लीन्हीं हात कतरणी खाँक में
आग बुझी मत जान गड़ी है राख में - ॥ ५ ॥
6- चहुं दिश लगा बाजार झिलमिल हो रही ।
झूमर होत अपार अधर डोरी नहीं । ६॥
7- चौदिश दिवलौ जोय महल बिच पोढणा ।
परनारी के संग जन्म क्यों खोवणा ॥ ७ ॥
8- साधु संत गुरु देव तहां चलि जाइये ।
और देवन को देव न चित में लाइये ॥ ८ ॥
9- और देवन को सेव भलो नहि जीव को ॥
कहे कबीर विचार मिली नहीं पीव को ॥ ९ ॥
पढ़ो सुगना सतनाम बैठ तन ताक में
चार दिना को रंग मिले तन खाक में ॥
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