भजन
टेक- मन नेकी करले
दो दिन का मेहमान || टेर ॥
1- जोरू लड़का कुटुम्ब कबीला
दो दिन का तन मन का मेला ।
अन्त काल को चलत अकेला
तज माया मंडान ॥ १ ॥
2- कहां से आया कहाँ जायेगा
तन छूटे मन कहाँ रहेगा ।
आखिर तुमको कौन कहेगा
गुरु बिन आतम ज्ञान ॥२ ॥
3- कौन तुम्हारा सच्चा सांई
झूठा यह संसार सदा ही
कहां मुकाम कहां जाय समाई
क्या बस्ती क्या गांव ॥३ ॥
4- रहटमाल पनघट पर फिरता
जावत रीता आवत भरता ।
जुगन जुगन ते जाता आता
क्यों करता अभिमान ॥४ ॥
5- हिलमिल रहणा देके खाना
नेकी बात सिखावत रहणा ।
साहिब कबीर का सत है कहना
भज लो निर्गुण नाम ।। ५ ।।
मन नेकी करले
दो दिन का मेहमान ||
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