भजन
टेक- भक्ति का मारग झीना
कोई जाणे जानन हार
संत जन ज्यो परवीना रे ॥
1- ना कोई चाय अचाय न तामें
मन लवलीना रे
सन्तो की संगत में निश दिन
रहता भीना रे || १ ||
2- शब्दों में सुरती यों बसे
जल चिच मीना रे ।
जल बिछड़त ततकाल होत यो
कंमल मलीना रे ॥ २ ॥
3- धन कुल ओ अभिमान त्याग कर
हुवा अदीना रे ।
परमारथ के हेत देत सिर
बिलम न कीना रे ॥ ३ ॥
4- धारण कियो संतोष सदा
अमृत रस पीना रे ।
भक्ति की रहणी कबीर जी
प्रगट कह दीना रे ॥ ४ ॥
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