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दीनबन्धु दीनानाथ मेरी / din bandhu dinanath meri

 टेक- दीनबन्धु दीनानाथ मेरी 

तस तस हरिये । टेर ॥ 


1- सोने का सनेही नहीं 

रुपे को रुपया नहीं । 

कौड़ी रुपया हाथ नहीं 

जासों कुछ लीजिये । 

दीनबन्धु दीनानाथ 

मेरी तस तस हरिये ।


2- भाई नहीं बन्ध नहीं 

कटुम्ब परिवार नहीं । 

ऐसा कोई मन्तर नहीं 

जासों मंतर कीजिये ॥ २ ॥ 

दीनबन्धु दीनानाथ 

मेरी तस तस हरिये ।


3- खेती नहीं , पाती नहीं 

बनिज व्यौपारा नहीं

ऐसा कोई शाह नहीं 

जासु कछु लीजिये ॥ ३॥ 

दीनबन्धु दीनानाथ 

मेरी तस तस हरिये ।


4- कहत है मलूक दास

 छोड़ दे बिरानी आस । 

ऐसा सतगुरु पाईके 

शरण किसकी लीजिये ॥ ४ ॥

दीनबन्धु दीनानाथ 

मेरी तस तस हरिये ।


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