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सतगुरु निर्वाणी जाके मुक्ति भरत है पाणी लिरिक्स / satguru he nirvani jake mukti bharat he pani lyrics

 टेक- सतगुरु निर्वाणी जाके 

मुक्ति भरत है पानी ॥ टेर ॥


1- अष्ट सिद्धि तो करे मजूरी 

और विधाता रानी । 

चन्द्र सुरज दोहु भये 

चिरागी सुरत गिगन गइरानी ॥ १ ॥ 

सतगुरु निर्वाणी जाके 

मुक्ति भरत है पाणी ॥


2- अर्थ धर्म अरु काम मोक्ष फल 

बैल फिले ज्यों घाणी । 

तहां एक है अगम अगोचर 

निगम नेति ना जाणी ॥ 2 || 

सतगुरु निर्वाणी जाके 

मुक्ति भरत है पाणी ॥


3- चार वेद नौ व्याकरण कहिये 

अष्टादश है पुराणी । 

सत्य भक्ति बिन चार पदारथ 

काग भिष्ट सम जाणी ॥३ ॥ 

सतगुरु निर्वाणी जाके 

मुक्ति भरत है पाणी ॥


4- अवरण वरण रूह नहीं बांके 

गरज गिगन गहराणी 

कहत कबीर सुनो भाई साधो 

अजर अमर निशानी ॥ 4 ॥

सतगुरु निर्वाणी जाके 

मुक्ति भरत है पाणी ॥


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