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सन्तो तन चीन्हे मन पाया लिरिक्स, santo tan chinhe man paya lyrics

टेक- सन्तो तन चीन्हे मन पाया ।

तन ही मन है निरगुण मन है 

मन ही निरंजन राया ॥ टेर ॥

 

1- मन गुण तीनों पाँच तत्व में 

मुझंका सकल पसारा । 

जैसे चंद उद्क में दीखे है 

मांही संत न्यारा | 

सन्तो तन चीन्हे मन पाया ।


2- जाग्रत सुपन सुषोपित तुरिया 

चारों तन के मांई ।

तन औतार असंख्य कला हो 

ये तन से दुसरा नाहीं । 

सन्तो तन चीन्हे मन पाया ।


3- आद हता सो अब है संतो 

सदगुरु भेद बताया । 

कहे कबीर कंचन के भूषण

एक आवाज बताया ।

सन्तो तन चीन्हे मन पाया ।


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