निसाणा हे रे निसाणा
साखी
1- चांद नहीं सूरज नहीं , हला नहीं ओंकार ।
तहाँ कबीरा संतजन कौ जाने संसार ।।
भजन
टेक- निसाणा हे रे निसाणा हे मनवारे गगन के बीच ।
निसाणा उड़ाया ब्रहमंड बिच ।।
1- डाबो चंदरमा ने जिमणो हे सुरज ।
दोनों के बीच चलो आना गगन के बीच ।।
निसाणा हे रे निसाणा हे मनवारे गगन के बीच ।
निसाणा उड़ाया ब्रहमंड बिच ।।
2- कायन का हारवा ने कायन का रोजा
कायन का बणया धुंधकारा ॥
निसाणा हे रे निसाणा हे मनवारे गगन के बीच ।
निसाणा उड़ाया ब्रहमंड बिच ।।
3- हरि का तो हारवा ने सुरता का रोजा ।
सुमरण का बणया धुंधकारा
निसाणा हे रे निसाणा हे मनवारे गगन के बीच ।
निसाणा उड़ाया ब्रहमंड बिच ।।
4- तमरा तो बैठा साहेब कदीयन छुटे
अनघड़ का औसारा
निसाणा हे रे निसाणा हे मनवारे गगन के बीच ।
निसाणा उड़ाया ब्रहमंड बिच ।।
5- मारया बाण घाव नहि तन में
जिन लागा तिन जाना
निसाणा हे रे निसाणा हे मनवारे गगन के बीच ।
निसाणा उड़ाया ब्रहमंड बिच ।।
6- कहे कबीर सुणो भाई साधो
जिन जाना तिन माना गगन के बीच ।
निसाणा हे रे निसाणा हे मनवारे गगन के बीच ।
निसाणा उड़ाया ब्रहमंड बिच ।।
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