नैहरवा में आग लगी
साखी
1- आग लगी आकाश में जल - जल पड़े अंगार ।
कहे कबीर उठ जागरे जलन लागा संसार ॥
2- झाल उठी झोली गली , खपरा फूटम फूट ।
जोगी था सो रमि रहा , आसन रही भभूत ॥
भजन
टेक- म्हारा सुसरा से कीजो रे संदेश
नैहरवा में आग लगी
आग लगी हो ऐसी आग लगी
कोई भेजे साहेब को संदेश
नैहरवा में आग लगी
1-
म्हारो घर सारो जल गयो
दिल में बड़ो हे अंदेश पाड़ - पड़ोसन सगरे जल गये
भाग , हाँ भाग , सके ना कोई एक ॥
नैहरवा में आग लगी
म्हारा सुसरा से कीजो रे संदेश
नैहरवा में आग लगी
2- माता जल गये पिता भी जल गये
जल गयो सासु को देश ।
भाई बन्ध भौजाई जल गये
हम धन रईगी है एक ॥
नैहरवा में आग लगी
म्हारा सुसरा से कीजो रे संदेश
नैहरवा में आग लगी
3- तीन कोटि पंच महला भी जल गये
जल गई वस्तु अनेक ।
जनम - जनम की गृहस्थी जल गई
जलीगई करम की रेख ॥
नैहरवा में आग लगी
म्हारा सुसरा से कीजो रे संदेश
नैहरवा में आग लगी
4- तीनो पण थने धोके में खोया ना
कियो गुरुजी से हेत ।
कहे कबीर सुणो भाई साधो
चाली साहेबजी का देश ।
नैहरवा में आग लगी
म्हारा सुसरा से कीजो रे संदेश
नैहरवा में आग लगी
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